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बस के सफर में अजनबी औरत की चूत चाट लिया

हाई दोस्तों, मैं 27 साल का हूँ और गोरा हूँ. दिखने में ठीक ठाक हूँ और बॉडी भी फिट हे मेरी. मैं हैदराबाद में काम करता था और वीकेंड पर अक्सर मैं बंगलौर जाता था अपने दोस्तों के पास. एक दिन ऐसी ही एक ट्रिप के लिए मैंने माधोपुर से बस पकड़ी रात के 9 बजे वाली. मैंने देखा की एक गुड लुकिंग औरत जो करीब 34-35 साल की थी वो खिड़की के पास बैठी थी. उसकी बगल वाली सिट मेरी थी. कुछ देर तक तो कुछ हुआ ही नहीं. रात के 10 बजे बस खाने के लिए रुकी.खाने के बाद मैंने हेडफोन लगा लिए और बस चलने लगी. अब लाईट बंद हो गई थी. फिर मुझे महसूस हुआ की मेरे कंधे उस औरत के कंधो से टच हो रहे थे. मैंने गाने बंद कर दिए और उसके टच को एन्जॉय करने लगा. फिर मैंने धीरे से अपने लेग को उसकी तरफ बढ़ाया. हम दोनों के लेग्स और जांघे टच हो रही थी. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो जाग रही थी और उसकी नजर खिड़की के बहार थी. मैंने फिर हिम्मत की और धीरे से उसकी कमर वाले हिस्से को टच किया. बस के झटको से वैसा हो रहा था ऐसी एक्टिंग करते हुए!

और उसने कुछ नहीं कहा तो मेरा वहां टच करना बार बार होने लगा. और फिर तो मैंने अपने हाथ को वहां कमर पर ही रख दिया कुछ देर के लिए. मैंने अपनी आँखे बंद कर ली थी और दिल जोर जोर से धडक रहा था और डर भी लग रहा था मुझे. मैंने सोचा की अगर वो इंटरेस्ट नहीं दिखाती हे तो मैं हाथ ले लूँगा. लेकिन उसने कोई विरोध नहीं किया तो मेरा लंड बवाल मचाता ही रहा.फिर जैसे मैंने पहली बार उसकी कमर को टच किया था वैसे उसके बूब्स को हलके से टच कर के हाथ वापस ले लिया. और मैंने तभी उसे देखा, वो भी मुझे ही देख रही थी. मेरे दिल में डर की लहर दौड़ उठी. उसने मेरी पेंट की तरफ देखा और मेरे और भी करीब हो गई. मेरा गला सूखा पड़ा था और मैं समझ नहीं पा रहा था की अब क्या करूँ और कैसे करूँ!

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उसने एकदम धीरे से अपना हाथ मेरी जांघ के ऊपर रख दिया. फिर मैंने भी अपने हाथ को पहले उसकी कमर के ऊपर और फिर उसकी जांघ के ऊपर रख दिया. उसकी उंगलिया चलते हुए धीरे से मेरे लंड की तरफ बढ़ गई. मेरा लंड जो एकदम खड़ा था उसे वो ऊँगली से टच कर रही थी. मैंने भी उसकी चूत के ऊपर हाथ रख के प्रेस किया. उसकी चूत बालवाली थी. मेरा ये फर्स्ट टाइम था और मैं आउट ऑफ़ कंट्रोल हो रहा था.मैंने धीरे से उसकी ट्रोउसेर की जिप को खोली और अपनी ऊँगली को अंदर डाल दी उसकी चड्डी में. उसने इसकी उम्मीद नहीं रखी थी और उसने मेरे लंड को जोर से कस के पकड़ लिया. मैं अपनी उंगलिया उसकी हेरी चूत के ऊपर घुमाने लगा था. मुझे पता नहीं था की उसका छेद कहा था. वो भी एकदम चुदासी और गीली हो चुकी थी मेरे जैसे ही. शायद उसे पता चल गया की मैं उसकी चूत के छेद को ही खोज रहा था उसने दुसरे हाथ से मेरी मदद की और अपने छेद के ऊपर मेरा हाथ रखवा दिया. मुझे बहुत ही सनक चढ़ गई थी और पसीना भी छुट रहा था.

ब्लू फिल्म्स में जैसे देखा था वैसे मैं उसकी चूत के अन्दर ऊँगली करने लगा अंदर बहार. उसने लंड को जकड़े हुए था अपने हाथ से. मैंने 2 3 मिनिट के बाद ऊँगली को उसकी चूत से निकाला और उसका सवाद चखा. मैं अब सच में उसकी चूत को चाटना चाहता था.उसने अपनी बेग से एक चद्दर निकाली और हम दोनों के ऊपर डाली. फिर उसने अंदर ही कुछ किया. जब मैंने हाथ डाला तो देखा की वो अपनी पेंट का बटन खोल के उसे निचे कर के अपनी चूत को मेरे लिए खोल चुकी थी. उसने मेरी जिप भी खोल दी और लंड को बहार निकाल के स्ट्रोक करने लगी थी. मैं निचे झुका. काफी अँधेरा था और ऊपर से मैं चद्दर में था. कुछ दिखा नहीं इसलिए मैं अपनी जबान को निकाल के चूत के छेद को खोजने लगा. उसने मेरी उलझन को दूर करने के लिए मेरे माथे को अपने छेद के ऊपर लगा दिया. उसने जैसे मुझे बताया की यहाँ इसको चाटना हे.

मैंने उसकी गीली और सेक्सी चूत को चाटना चालू कर दिया. मैं उसे आइसक्रीम के जैसे खा रहा था. उसकी चूत के बाल एकदम सॉफ्ट सॉफ्ट थे और चूत की खुसबू भी एकदम मस्त थी. वो भी अपनी जांघो को थोडा थोडा हिला के अपनी चूत को मेरे मुहं के ऊपर घिसने लगी थी. और वो अपने हाथ से मेरे लंड को मस्त हिला भी रही भी. 10 मिनिट लंड हिलाने के बाद मेरा पानी निकल गया. मैं पीछे हटना चाहता था लेकिन उसने मुझे जाने नहीं दिया. उसने मेरे माथे को चूत पर दबा के रखा. और वो मेरे लंड को हिलाती ही रही. उसकी चद्दर और हाथ दोनों मेरे वीर्य से खराब हो गए थे.लेकिन 2-3 मिनिट में उसने वापस से मेरे लंड को खड़ा कर दिया. मैं उसकी चूत को ऐसे ही मजे से खाता रखा. फिर मैंने धीरे से अपनी जबान को चूत के होल में डालना चाहा. और जब होल में जबान घुसी तो उसके मुहं से आह निकल गया. मैं डर गया की कही उसकी मोअन किसी ने सुन ली तो प्रोब्लम हो ना जाए!

अब वो मुझे और भी जोर जोर से स्ट्रोक कर रही थी. और 20 मिनिट के अन्दर एक बार फिर से मेरे लंड का पानी निकल गया. अब की कुछ ज्यादा ही वीर्य बहार आया था. 10-15 सेकंड के बाद उसने भी मेरे माथे के ऊपर जो प्रेशर बनाया था उसे हल्का कर दिया. उसकी चूत भी अपना पानी छोड़ चुकी थी. मैंने जितना चाट सकता था उतना चाट लिया उसके चूत के पानी को. फिर मैंने मुहं चद्दर के बहार निकाल के उसे देखा तो वो मुझे स्माइल दे रही थी. उसके चहरे के ऊपर थेंक्स के भाव थे.

हल्का होने की वजह से मुझे नींद भी जल्दी ही आ गई.

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सुबह बंगलौर आने के कुछ देर पहले मैं जागा. वो अभी भी सो रही थी. मैंने पहली बार उसके चहरे को ध्यान से देखा. वो बड़ी खुबसुरत लग रही थी. देखा देखी में बंगलौर भी आ गया. बीएस स्टॉप के उपर उतर के मुझे ऐसी आशा थी की वो मेरे से बात करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वो चल पड़ी. पुरे किस्से में हम दोनों ने एक शब्द की भी बात नहीं की थी और एक दुसरे को सटिसफाई किया था.मेरी लाइफ का ये एक सुनहरा पन्ना जरुर था. लेकिन मैं अपनेआप को आज कोसता भी हूँ. शायद मुझे ही पहल करनी चाहिए थी बस से उतर के. वो मुझे अपना नम्बर और पता जरुर देती अगर मैं मांगता. लेकिन शायद मैं बहुत खुश था उसके हाथो मुठ मारा के इसलिए….!

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