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मैंने अपनी बुआ की बेटी की बेटी को चोदा और उसकी गांड भी मारी

desi kahani हेल्लो दोस्तों मेरा नाम प्रतीक है, और मैं सुलतानपुर का रहने वाला हूँ। मैं आप सभी का देसी पोर्न स्टोरी डॉट कॉम मे बहुत बहुत स्वागत करता हूँ। मुझे बचपन से ही सेक्स कहानियां पढने का बहुत शौक था। अभी मेरी उम्र 21 साल हो होगी, और मैं अपनी पढाई पूरी कर चूका हूँ। मैंने अपनी जिन्दगी में कुछ ही लडकियो से दोस्ती की थी और उनमे से मैंने एक लड़की को फंसा भी लिया था। पहले हम केवल बातें करते और फिर धीरे धीरे मैं उसके चूचियो को दबाना शुरू किया और फिर कुछ दिनों बाद मैंने उसे चुदने के लिए भी मना लिया। मैं उसको अपने दोस्त के रूम पर ले गया और फिर मैंने अपनी जिन्दगी की पहली लड़की की चुदाई की। वो मेरी पहली चुदाई थी इसलिए मज़ा तो बहुत आया लेकिन मैं बहुत देर तक उसकी चुदाई न कर सका। पहली चुदाई के बाद मैंने एक दिन फिर से उसको चोदने के लिए मना कर अपने दोस्त के घर ले गया और फिर उस दिन मैंने उसकी चुदाई बहुत देर तक की। उस दिन उसने मुझसे कहा – “अब मैं तुमसे नही चुदुंगी क्योकि तुम जब चोदने लगते हो तो भूल जाते हो की तुम्हारे इतने तेज चुदाई से मेरा क्या हल हुआ होगा”। मेरी उस चुदाई से उसने मुझसे ब्रेक अप कर लिया। और फिर बहुत दिनों तक मुझे किसी भी चूत के दर्शन नही हुए।
कुछ महीने पहले की बात है जब मैंने अपनी तैयारी के लिए बुआ के घर आया था। मेरा तो कोई प्लान ही नही था की मैं बुआ के घर आऊ और वहां से तैयारी करूँ लेकिन जब मेरी पढाई पूरी हो गई तो पापा ने मुझसे कहा – “अब तुम्हारी पढाई पूरी हो गई और तुम अगर तैयारी करना चाहो तो इलाहबाद चले जाओ वहां तुम्हारी बुआ रहती है उनके साथ में रहना और तुम्हारी तैयारी भी हो जायेगी”। मैंने पापा से कहा ठीक है मैं चला जाऊंगा। जब मैं यहाँ आने वाला था तो मुझे ये भी नही पता था की वहां मेरी तैयारी के साथ साथ मेरी चूत चोदने का भी सपना पूरा हो जायेगा।

कुछ महीने पहले मैं बुआ के घर आ गया, जब मैं यहाँ आया तो मेरी क्लास शुरू नही हुई थी, तो कुछ दिन मैंने पहले वहां घूमा और जब क्लास सुरु हुआ तो मैंने क्लास ज्वाइन कर लिया।
मेरी बुआ के दो बच्चे थे एक लड़की और एक लड़का, लड़की का नाम नेहा था और लड़के नाम रवि था। रेखा देखने में बहुत ही अच्छी और अभी जवान हुई थी। वो लगभग 18 साल की होगी। उसकी आंखे बड़ी बड़ी थी और टमाटर की तरह लाल और पतले से होठ और काफी लाल भी। उसको देखने के बाद तो ऐसा लगता था की जैसे कोई पारी है जो अभी अभी असमान से आई है। नेहा ने एक दिन अपनी मामी से कहा – मम्मी मुझे भी तैयारी करनी है?? तो उसकी मम्मी ने कहा पहले पढ़ तो लो फिर बाद में तैयारी करना। तो उसने कहा मैं साथ में ही तैयारी करुँगी। इस बात मैंने भी बुआ से कह दिया हाँ बुआ पढाई के साथ में भी तैयारी कर सकते है। और ये तो अच्छा ही है मैं भी अकेले बोर हो जाता हूँ कोई मेरे साथ भी पढने वाला हो जायेगा।
बुआ ने कहा ठीक है कल से प्रतीक के साथ में चली जाना। मैंने जरा भी नहीं सोचा था मेरे साथ पढने से मेरी और नेहा की चुदाई की कहानी बन सकती है। मैं और नेहा दोनों साथ में जाने लगे और घर में भी साथ में ही पढ़ते थे। जब हम लोगो को पढना होता था तो हम एक अलग कमरे में चले जाते और फिर वही पर अकेले में पढ़ते थे।

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कुछ दिन बीत गया हम दोनों एक दुसरे के काफी करीब आ गये थे एक दुसरे के बारे में बहुत से बात जान गये थे। एक दिन मैं और नेहा दोनों पढ़ रहे थे और उस दिन उसने एक ढीला सा टॉप पहना था और उसने ब्रा भी नही पहना था, हम दोनों पढ़ रहे थे और फिर कुछ देर बाद नेहा थोडा सा झुकी और उसकी गोरी सी चूची थोड़ी सी दिखने लगी। उस दिन मैंने पहली बार उसकी चूची को देखा था, जब मैंने उसने मम्मो को देकः तो पहले मैंने सोचा ये गलत बात है ये मेरी बहन के जैसी है लेकिन जब वो कुछ देर तक झुकी रही तो मैंने अपने आप को रोक नही पाया उसकी गोरी गोरी चूचियो को देखने से। मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा और मैं अपने लंड को अपने हाथो से दबंते हुए किसी तरह से अपने आप को रोके हुए थे। कुछ देर बाद मैंने नेहा से कहा – मैं अभी आता हूँ तुम पढो, मैं वहां से चला गया और बाथरूम में जाकर मैं मुठ मरने लगा, मैं मुठ मर ही रहा था की बाथरूम का दरवाज़ा खुला और नेहा बाहर खड़ी हुई थी मैंने उसके सामने अपने लंड को हाथ में लिए खड़ा था, मैंने तुरंत दरवाज़ा बंद कर लिया। मैंने सूचा दरवाज़ा कैसे खुल गया, लगता है मैंने ठीक से बंद नही किया था। कुछ देर बाद मैंने अपने चहरे को छुपाते हुए बाहर निकल और फिर सीधे अपने कमरे में चला गया। क्योकि मुझे बहुत शर्म आ रही थी।
मैं बहुत देर बाद अपने कमरे से बाहर आया और मार्किट में घूमने के लिया चल गया। जब मैं वापस घर आया तो नेहा के मामा आये हुए थे कुछ देर उनसे बात करने के बाद मैं अपने कमरे में पढने के लिए चला गया। जब मैं वहां पहुंचा तो नेहा पहले से पढ़ रही थी। मुझे उसके सामने थोडा शर्म आ रही थी लेकिन मैं फिर भी उसके साथ में पढ़ रहा था। मेरी निगाहे उसकी चूचियो पर कभी कभी चली जाती थी कि कंही दिख तो नही रही है उसकी चूचियां। पढ़ते पढ़ते रात हो गई और फिर हमने खाना खाने के बाद फिर कुछ देर पढ़ा। हम पढ़ ही रहे थे, और फिर वहां बुआ आई और नेहा से कहा – “आज तुम्हारे मामा आये है और वो रवि के साथ में लेटे है तुम चाहो तो मेरे साथ में लेट जाओ”। तो नेहा ने कहा – “मम्मी मैं अभी कुछ देर तक पढूंगी और फिर मैं यंही प्रतीक के कमरे में सोफे पर ही लेट जाउंगी आप चिंता मत करना”। तो बुआ ने कहा ठीक है।

बुआ वहां दे चली गई और फिर हम बहुत देर तक पढने के बाद थक चुके थे और लेटने के बारे में सोच रहे थे, मैंने नेहा से कहा – तुम चाहो तो ऊपर लेट जाओ और मैं सोफे पर लेट जाऊंगा। तो उसने कहा – दोनों लोग ऊपर ही लेट जाते है जगह तो है ही बिस्तर पर। जब उसने ये बात कही तो मेरे मन में नेहा के बारे में गलत सोच आने लगी। नेहा ने दरवाज़ा बंद किया और फिर हम एक ही बिस्तर पर लेट गए। कुछ देर तो मुझे नीद नहीं आ रही थी मैं अपनी करवटे बदल रहा था । मेरे मन में नेहा के साथ में चुदाई के बारे में चल रहा था, मैं सोचा रहा था कैसे मैं नेहा को चोदुं। कुछ देर बाद जब मुझे लग नेहा सो गई तो मैंने अपने अपने हाथ को धीरे से उसकी चूचियो के ऊपर रख दिया और फिर कुछ देर बाद मैं धीरे धीरे उसके मम्मो को दबाने लगा। कुछ देर बाद नेहा मुझसे चिपक गई और मेरे हाथ को उसने पकड़ लिया और फिर अपने चूचियो में लगते हुए मेरे हाथ को अपने चूत तक ले गई और अपने हाथ को मेरे लंड के ऊपर रख दिया और मेरे लौड़े को जोर जोर से बनाने लगी।
मैंने भी तुरंत उठ कर उसके होठो को चूमने लगा और साथ में उसकी चूचियो को भी दबाने लगा मैं बहुत देर से उसको चोदने के बारे में सोच रहा लेकिन कुछ नही कर पा रहा था। जब मैंने उसने किस करना शुरू किया तो कुछ देर बाद नेहा ने भी मुझे जोर से अपने बाँहों में बहर लिया और मेरे होठो को बड़े जोश से पीने लगी। मैं और नेहा दोनों बड़े जोश में थे और हमने बहुत देर तक एक दुसरे के होठो को पिया।
बहुत देर तक होठो को पीने के बाद मैंने और नेहा दोनों ने अपने कपड़ो को निकाल दिया और फिर हम एक दुसरे से लिपट कर एक दुसरे को चूमने लगे। बहुत देर तक मैंने उसके गले और उसके चिकने हाथो को चूमता रहा और फिर मैंने अपने हाथो की उंगलियो को उसके चहरे से सहलाते हुए उसके गले से होते हुए उसकी मुलायम, चिकनी, और काफी सुडोल चूचियो के पास ले गया और फिर मैंने धीरे धीरे उसकी चूचियो के निप्पल के चारो तरफ गोल गोल किया उसके ब्रा के ऊपर से ही और फिर मैंने उसके ब्रा को निकाल दिया और अपने दोनों हाथो से उसके मम्मो को दबाना शुरु किया और कुछ देर तक मम्मो को दनाने के बाद मैंने उसके निप्पल को चुमते हुए मैंने उसकी चूचियो को अपने मुह में ले लिया और उसकी मम्मो को पीने लगा। मुझे काफी मज़ा आ रहा था क्योकि मुझे बहुत दिनों के बाद किसी के दूध को पीने को मिला था और नेहा की चूची थी ही इतनी अच्छी की मेरा मन तो उसको चोदने ने कर ही नही रहां था। मैंने बहुत देर तक उसकी चूचियो को अपने हाथो से मसाला और उसकी चूचियो को पिया भी।

फिर मैंने अपने लंड को नेहा के मुह में लगा कर उसको चूसाने लगा। वो मेरे लंड को बड़े प्यार से आगे पीछे करते हुए चूस रही थी और मेरे पूरे लंड को अपने मुह के अंदर लेकर वो चूस रहा थी। जिससे मुझे तो मज़ा आ रहा था लेकिन साथ में नेहा को भी मज़ा आ रहा था।
20 तक उसने मेरे लैंड को चूसा, फिर मैंने अपने अपने लंड को उसकी चूत के पास ले गया और अपने लंड को उसकी चूत में मैंने धीरे से अपने लंड को नेहा के चूत में डाल दिया। मेरे लंड के अंदर जाते ही वो तडप उठी और मुझे पीछे की तरफ धकेलने लगी। मैंने फिर से अपने लंड को उसकी चूत में लगाया और फिर से चोदने के लिए तैयार हो गया। मैंने इस बार अपने लंड को धीरे धीरे से उसकी चूत में डाला और कुछ देर तो धीरे धीरे डाला और फिर कुछ देर बाद मैं तेजी से उसकी चुदाई करना किया, मेरे मोटे लंड को नेहा सहन नही कर पा रही थी और अपने शरीर को एंठते हुए सिसक रही थी। लेकिन फिर भी मैं रुक नही रहा था और लगातार बैटिंग कर रहा था।
बहुत देर तक मैंने उसको बिस्तर पर ही चोदा और फिर मैंने नेहा को अपने गोद में उठा लिया और फिर अपने लंड को उसकी चूत में लगा कर मैंने उसको गोदी में चोदना शुरू कर दिया। पहले तो ज्यादा मज़ा नही आ रहा था लेकिन जब कुछ देर बाद नेहा भी अपनी कमर उठा कर मुझसे चुदने लगी, तो मुझे भी मज़ा आने लगा। नेहा अपने हाथ को मेरे कंधे पर रखे हुए बार बार ऊपर नीचे हो रही थी जिससे मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक चला जाता। कुछ देर बाद जब मैं तेजी से उसकी चुदाई करने लगा तो नेहा अपने मुह को एंठते हुए ….. अआह्हह आह्ह्ह अह्ह्ह .. ओहो ओह्ह्ह ओह्ह …. उफ़ उफ़ …उफ्फ्फ्फ़ .. उनहू उनहू …सी सी सी सी …. आआअ .. मम्मी मम्मी … माँ माँ …. उन उह उह उह ……उह्ह्ह्ह … प्लीस्स्सस्स्स ह़ा आह्ह्हह्ह अहह .. करके चीखने लगी। कुछ देर लगातार मैंने उसकी चूत को चोदता रहा और फिर मेरे लंड से मेरा वार्य निकलने वाला था और फिर मैंने उसको अपनी गोदी से नीचे उतार दिया और फिर जल्दी जल्दी मुठ मरने लगा। कुछ देर मुठ मरने से मेरे लंड से पिचकारी की तरह पिच पिच करके मेरे शुक्राणु निकलने लगे। उस दिन मेरा मन उसकी गांड भी मरने को कर रहा था लेकिन मैं जल्दी ही आउट हो गया। लेकिन जब मैंने उसको फिर दोबार चोदा तो मैंने उसकी गांड भी मारी।

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